न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 5 नवंबर जामताड़ा। दीपावली का त्योहार केवल घरों को रोशनी से सजाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी को संजोने का भी पर्व है। इसी संदेश के साथ जामताड़ा के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार ने जिलेवासियों से इस बार दीपावली पर मिट्टी के पारंपरिक दीयों को विशेष प्राथमिकता देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से स्थानीय कुम्हारों और छोटे शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए दीये खरीदकर उनकी आजीविका को संबल प्रदान करने का आग्रह किया।उपायुक्त ने कहा कि दीपावली भारतीय संस्कृति, आस्था और प्रकाश का प्रतीक पर्व है। सदियों से मिट्टी के दीये इस त्योहार की पहचान रहे हैं। बदलते समय के साथ बाजार में रंग-बिरंगी विद्युत लाइटों और आधुनिक सजावटी सामानों का चलन बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक दीयों का महत्व आज भी बरकरार है। इसलिए आधुनिक सजावट के साथ मिट्टी के दीयों को भी घरों, प्रतिष्ठानों और पूजा स्थलों में स्थान देना चाहिए।उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगर पूरे परिश्रम और हुनर से मिट्टी के दीये तैयार करते हैं। ऐसे में उनकी बनाई वस्तुओं की खरीदारी करना केवल एक व्यावसायिक लेन-देन नहीं, बल्कि उनके श्रम और कला के प्रति सम्मान प्रकट करना है। लोगों की छोटी-सी खरीदारी भी किसी कुम्हार परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है।उपायुक्त ने जिलेवासियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की भावना को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि त्योहारों की खरीदारी में स्थानीय बाजारों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इस दीपावली अपने घरों को रोशन करने के साथ उन परिवारों के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचाएं, जिनकी मेहनत से यह पारंपरिक कला आज भी जीवित है।
मिट्टी के दीयों से जगमगाएं घर-आंगन, स्थानीय कुम्हारों की मेहनत को दें सम्मान : उपायुक्त
