एसआईआर प्रक्रिया पर झामुमो का हमला: “गरीबों को कागज़ी जाल में फंसाने की कोशिश”, चमेली देवी ने भाजपा पर साधा निशाना

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 24 मई 2026 जामताड़ा। झारखंड में प्रस्तावित एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नेत्री चमेली देवी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के कमजोर तबकों को परेशान करने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रियाओं के जरिए गरीब, आदिवासी, दलित, पिछड़े और मजदूर वर्गों को अनावश्यक रूप से दस्तावेज़ी उलझनों में फंसाने की तैयारी की जा रही है।चमेली देवी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जो पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना आसान नहीं है। उनके मुताबिक, एसआईआर जैसी व्यवस्था लागू होने पर लोगों को सत्यापन और कागजी प्रक्रिया के बोझ से गुजरना पड़ सकता है, जिससे आम नागरिकों की परेशानी बढ़ेगी।उन्होंने भाजपा पर चुनावी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि हर चुनावी माहौल से पहले जनता की पहचान, नागरिकता और अधिकारों से जुड़े मुद्दे क्यों सामने आने लगते हैं। उनका कहना था कि जनता रोजगार, कृषि, महंगाई और विकास जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है, लेकिन इन सवालों से ध्यान हटाने के लिए नए विवाद पैदा किए जा रहे हैं।झामुमो नेत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं या जिनका जीवन पलायन, प्राकृतिक आपदा और गरीबी से प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की कमी को आधार बनाकर लोगों की पहचान और अधिकारों पर सवाल उठाना उचित नहीं है।चमेली देवी ने स्पष्ट किया कि झामुमो राज्य की जनता को प्रभावित करने वाली किसी भी नीति का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी सड़क से लेकर सदन तक लोगों की आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध है और यदि किसी प्रक्रिया से आम नागरिकों को परेशानी होती है तो उसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि झारखंड संघर्ष और जनआंदोलनों की भूमि रही है तथा यहां की जनता अपने अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा सजग रही है।

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