न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 3 नवंबर जामताड़ा। दिवंगत समाजसेवी अनिल मुर्मू के श्राद्धकर्म के अवसर पर मंगलवार को शहरडाल पंचायत के कीनूडीह गांव स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान माहौल गमगीन रहा, लेकिन संताली समाज की पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों ने आयोजन को एक अलग पहचान दी। परिजनों, ग्रामीणों और समाज के विभिन्न वर्गों से पहुंचे लोगों ने नम आंखों से उन्हें याद करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में संताली समाज की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े गुरु हड़ाम रेणु मुर्मू अपने काराम दल के सदस्यों के साथ पहुंचे। उन्होंने दिवंगत अनिल मुर्मू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उनके साथ आए लोगों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मौके पर भारतेंदु मुर्मू, लखन किस्कू और नेहरू सोरेन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।श्रद्धांजलि सभा का सबसे भावुक और विशिष्ट पहलू संताली परंपरा के अनुरूप दी गई सांस्कृतिक विदाई रही। काराम दल के सदस्यों ने मांदर की पारंपरिक थाप पर संताली नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपरागत रीति के अनुसार दिवंगत समाजसेवी को श्रद्धांजलि दी।आयोजन के दौरान एक ओर परिजनों और शुभचिंतकों की आंखें नम थीं, वहीं दूसरी ओर मांदर की गूंज और पारंपरिक नृत्य में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान जीवंत नजर आई। इस अनूठे आयोजन ने यह संदेश दिया कि संताली समाज में किसी प्रियजन को अंतिम विदाई देना केवल शोक व्यक्त करना नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान प्रकट करना भी है।
मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य के बीच समाजसेवी अनिल मुर्मू को दी गई भावभीनी विदाई
