लदना में हूल दिवस पर वीर शहीदों को नमन, बलिदान की गाथा सुनाकर नई पीढ़ी को किया प्रेरित

न्यूज 61 लाइव संवाददाता काजल राय चौधरी 1 जुलाई 2026 जामताड़ा। संताल हूल के अमर वीरों की स्मृति में लदना गांव में ओंकार सेवा संस्थान की ओर से हूल दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव सहित हूल आंदोलन के सभी शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि हूल आंदोलन केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध आदिवासी समाज के स्वाभिमान और अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई थी।कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं उन्हें नमन करते हुए की गई। उपस्थित लोगों ने उनके बलिदान को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सिद्धो-कान्हू और उनके साथियों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका संघर्ष आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की प्रेरणा देता है।मौके पर माझीहड़ाम हेमंत मुर्मू ने कहा कि हूल दिवस आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने नई पीढ़ी से अपने इतिहास और संस्कृति को जानने तथा महान क्रांतिकारियों के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।लदना पंचायत की मुखिया पार्वती सोरेन ने कहा कि शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके संघर्ष ने समाज को अधिकारों के प्रति जागरूक किया और आज भी उनकी प्रेरणा लोगों को एकजुट होकर समाज के विकास के लिए कार्य करने की सीख देती है। वहीं मुखिया पति परिमल मरांडी ने भी हूल आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज में शिक्षा, एकता और जागरूकता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम में ओंकार सेवा संस्थान के संतोष पाल, सुचिंदर भगत, अनिल मुर्मू, सोनाली बाउरी, शांति किस्कू और गौरव सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने शहीदों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज में भाईचारा, समानता तथा जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन का वातावरण देशभक्ति, सामाजिक एकता और शहीदों के प्रति सम्मान से ओतप्रोत रहा।

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